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Satellite Kya Hai? Kaise Kaam Karti hai|Satellites Types|Hindi

Satellite Kya Hai? Kaise Kaam Karti hai

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Satellite
 
“satellite kya hai” satellite एक ऐसा छोटा Object होता है जो अपने से कही बड़े Object के Free Space में,हवा में चारो तरह चक्कर काटता है satellite उपग्रह कहलाता है| चन्द्रमा एक Natural satellite है| Man Made Satellite जो आप सुनते है की ISRO ने satellite launch किया है NASA ने satellite launch किया है| चन्द्रमा वो satellite नहीं है| चन्द्रमा पहले से ही अस्तित्व में था| भारत के Space Station का नाम ISRO (इसरो) जो बंगलौर(कर्नाटक) में स्थित है| तो दोस्तों आज हम satellite kya hai, satellite kaise kaam karta hai, satellite ke prakar के बारे में बिस्तार से जानेंगे इस आर्टिकल के माध्यम से| 
satellite ko hindi me upgrah (उपग्रह) kahte hai 
satellite 2 प्रकार की होती हैं|  

 

  • Artificial satellite:- चन्द्रमा 
  • Man made satellite:- INSAT-3D 
satellite का आकार, उचाई, कितनी तेजी से घुमेगा, उसके कार्य पर निर्भर करती है| कुछ satellite आपके घरों में रखे Refrigerator के आकर की  और वही कुछ Satellite एक बड़े ट्रक के आकर के  भी हो सकती हैं| ये निर्भर करता है की Satellite आखिर किस काम के लिए Launch किया जा रहा है| इनका Basic Construction निर्माण लगभग समान ही रहता है| बड़े-बड़े Panel side में लगे हुए आपने देखा होगा| दरअसल ये Solar Panel होते है| जो सूर्य के प्रकाश से विद्युत निर्माण करते हैं जिससे  satellite सुचारु रूप से कार्य करता रहता है|
internet kya hai kaise kaam karta hai
 

satellite kya hai kaise kaam karta hai?

Technology के  विकास में सेटेलाइट का बहुत बड़ा योगदान है| जब किसी वस्तु को पृथ्वी से ऊपर फेंकी जाती है| एक निश्चित उचाई तय करने के बाद पृथ्वी पर वापस आ जाती है| इसका कारण है पृथ्वी उस वस्तु पर आकर्षण बल लगाती है| जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते है| यदि किसी वस्तु को किसी उचे स्थान से Horizontal फेके तो कुछ समय बाद वस्तु पृथ्वी पर गिर जाएगी 
 
वस्तु के पृथ्वी पर गिरने के 2 कारण है| 
 
  • पहला कारण पर्याप्त ऊंचाई का ना होना वस्तु को इतनी ऊंचाई से प्रक्षेपित करें जहां Air Resistance  ना के बराबर अर्थात लगभग 160 किलोमीटर है अन्यथा Air Resistance की वजह से उसका स्पीड लगातार कम होने लगेगा और अंत में पृथ्वी पर गिर जायेगा
 
  • दूसरा कारण है पर्याप्त स्पीड का ना होना प्रक्षेपित करते समय वस्तु का स्पीड पर्याप्त होना चाहिए क्योंकि पृथ्वी की वक्रता के कारण यदि आप 8000 मीटर Horizontal (क्षैतिज) दिशा में चले तो आप पाएंगे कि आप प्रारंभिक  Horizontal (क्षैतिज)  रेखा से 5 मीटर नीचे चले गए हैं| प्रक्षेपय पथ के प्रत्येक बिंदु पर  वस्तु पृथ्वी की ओर गिरता है और प्रत्येक 8000 मीटर की Horizontal दुरी तय करने के बाद 5 मीटर निचे आ जाती हैं| यदि प्रक्षेपित वस्तु 1 सेकेंड में 8000 मीटर दूरी तय करें वो वह  हर क्षण 5 मीटर पृथ्वी के निचे गिर जाएगा|  क्योंकि पृथ्वी इसी rate से curve  हो रही है इसलिए वस्तु का पृथ्वी के बीच की दूरी हमेशा नियत बनी रहेगी अब यदि हाइट, स्पीड पर्याप्त है तो उस वस्तु को वृताकार  पथ में गति करने के लिए हम किसी सरल रेखा में गति करने वाली वस्तु को हर क्षण 90 डिग्री से अर्थात उसके पथ  के लंबवत (Vertical) खींचे तो वो वृताकार पथ पर गति करने लगेगा| इस प्रकार 
  • यदि satellite को पृथ्वी तल से लगभग 160 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भेजकर उसे लगभग 8000 मीटर प्रति सेकंड का  Horizontal (क्षैतिज)  वेग दे दें तो वह पृथ्वी के चारों ओर एक नियत कक्षा में चक्कर लगाते रहता है|  सेटेलाइट को पृथ्वी के चारों और वृत्तीय कक्षा में परीक्षण करने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल पृथ्वी द्वारा गुरत्वाकर्षण बल से प्राप्त होता है|  satellite  पर लगने वाले अभिकेंद्रीय  बल हमेसा पृथ्वी के  केंद्र की ओर दिष्ट होता है| 
  • satellite को नियत कक्षा में स्थापित करने के लिए Rocket  का इस्तेमाल करते हैं| satellite Launch करते समय ध्यान रखा जाता है कि राकेट का प्रारंभिक वेग पृथ्वी के तल पर स्थित इनके पलायन वेग से ज्यादा नहीं होना चाहिए अन्यथा satellite  गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र  को पार कर जायेगा इस Condition में वो न तो किसी कक्षा में स्थापित हो पाएगा और ना ही पृथ्वी पर वापस आएगा rocket से  satellite  रिलीज होने के बाद उसकी चाल पृथ्वी तल से ऊंचाई के अनुसार होना चाहिए| 
 
  • सेटेलाइट के नियत कक्षा में स्थापित हो जाने के बाद परिक्रमा करने के लिए इंधन की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि सेटेलाइट को पृथ्वी के चारों ओर घुमाने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से प्राप्त हो जाता है लेकिन सेटेलाइट में लगे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को संचालित करने के लिएइलेक्ट्रिसिटी  की जरूरत पड़ती है ये  इलेक्ट्रिसिटी दो तरीके से जनरेट की जा सकती है|
 
  • सोलर पैनल:-  जिसमें सेमीकंडक्टर फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट से सन लाइट को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में कन्वर्ट करता है| 
  • सीबेक इफ़ेक्ट: उन उपग्रहों के मामले में जो सूर्य से काफी दूर भेजे जाते हैं रेडियो आइसोटोप थर्मो  इलेक्ट्रिक जनरेटर का उपयोग किया जाता है जहां रेडियोएक्टिव पदार्थ को रखा जाता है जो decay  होने पर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं थर्मोकपर का उपयोग करके सीबेक इफ़ेक्ट के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी उत्त्पन किया जाता है| 
 
  • 1957 में रूस द्वारा Sputnik-1 के प्रक्षेपण के बाद विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में उन्नति के फलस्वरुप भारत सहित कई देश  दूरसंचार मौसम विज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक उपयोग के लिए मानव निर्मित satellite  को कक्षाओं में प्रमोचित ( Launched) कहने योग्य बन गए|
  •  सेटेलाइट को अलग-अलग उद्देश्य  के लिए अलग-अलग कक्षाओं व ऊंचाइयों में स्थापित किया जाता है जिनमें से कुछ प्रमुख हैं 

 Satellite kitne prkar ki hoti hai?

  • Polar satellite(ध्रुवीय उपग्रह):-Polar satellite(ध्रुवीय उपग्रह पृथ्वी तल से लगभग 500 से 800 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर स्थापित किया जाता है| ये पृथ्वी के ध्रुवो के परितः उत्तर दक्षिण दिशा में घूर्णन करते हैं जबकि पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती हैं  क्योंकि इन उपग्रहों  का आवर्तकाल लगभग 100 मिनट होता है ये किसी भी अक्षांश (Latitude) से कई बार गुजरते हैं इस पर लगे कैमरे द्वारा किसी एक कक्षा में केवल पृथ्वी की एक छोटी पट्टी का दृश्य लिया जा सकता है सलंगन पट्टिकाओं को अगली कक्षा में देखा जाता है इस प्रकार प्रभावी रूप से पूरे 1 दिन में पट्टी दर  पट्टी पूरी पृथ्वी का सर्वेक्षण किया जा सकता है| इस प्रकार सेटेलाइट द्वारा एकत्र सूचनाये सुदूर संवेदन मौसम, विज्ञान के साथ तिथि के पर्यावरणीय अध्ययन के लिए भी अत्यंत उपयोगी है| भारत में  सेटेलाइट को लांच करने के लिए PSVL (पीएसएलवी) का इस्तेमाल किया जाता है| 
  • भारत द्वारा लांच किए गए आईआरएस(IRS) समूह के सेटेलाइट ऐसे ही सुदूर संवेदी सेटेलाइट हैं
  • Geosynchronous satellite(तुल्यकाली उपग्रह) (से लगभग 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया जाता है इस सेटेलाइट का आवर्तकाल 24 घंटे अर्थात पृथ्वी के आवर्तकाल के बराबर रखा जाता है ताकि पृथ्वी की सतह पर स्थित किसी व्यक्ति को दिन के किसी समय पर वह सैटेलाइट अंतरिक्ष में उसी स्थान पर दिखाई दे जहां पिछले दिन उसी समय दिखी थी|ये सेटेलाइट पृथ्वी के किसी स्थान को हर दिन Same Time पर Cross करता है इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि वह पृथ्वी की दिशा में ही घूर्णन करें| वह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर रहे| तो वह Geosynchronous satellite(तुल्यकाली उपग्रह) कहलाती है| 
  • Geosynchronous satellite को पृथ्वी के Equator प्लेन में पृथ्वी के परितः वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया जाता है| यह satellite पृथ्वी के किसी भी स्थान से किसी भी समय देखने पर स्थिर प्रतीत होता है| एक निश्चित आवृति से अधिक आवर्ती की अधिक विद्युतीय  चुम्कीय तरंगे आयन मंडल द्वारा परावर्तित नहीं होती| दूरदर्शन प्रसारण या अन्य प्रकार के संचार में उपयोग होने आवृत्तिया (frequency) हमेसा High Quality की होती है| अन्तः इन्हे सीधे sight line(दृष्टि रेखा) से बाहर Receive नहीं किया जा सकता| प्रसारण केंद्र के ऊपर Geosynchronous satellite इन signals को Receive करके उन्हें पृथ्वी के वृहद क्षेत्र में प्रसारित करती हैं| आपके घर में लगा dishtv का एंटीना (LNV)  इन signals को receive करते हैं| इस तरह से एंटीना दिशा कक्षा में satellite के स्थिति से एक बार मिला देने पर वह हमेसा उसके संपर्क में रहता है 
  • भारत में Geosynchronous satellite Launch करने के लिए GSVL का उपयोग किया जाता है| भारत में satellite launched करने की जिम्मेदारी isro (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन) की है| 
  • isro का ध्येय हमेसा से अमेरिका रसिया से अलग रहा है इसरो मौसम का पूर्वानुमान, सुदूर सवेदन, दूरसंचार, नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, जनकल्याण के उपयोगी प्रोजेक्ट पर काम करता रहा है| इस प्रकार सॅटॅलाइट मानव जाती के लिए अनोखी छाप छोड़ चुकी हैं| 

Diffrent type of satellite

  • Communication satellite:-संचार उपग्रह एक कृत्रिम है जो जो एक ट्रांसपोंडर के माध्यम से रेडियो दूरसंचार संकेतो प्रसारण और बिस्तार करता है| यह पृथ्वी पर विभिन्न  स्थानो पर एक स्रोत ट्रांसमीटर और एक रिसीवर  बीच एक संचार चैनल बनाता है संचार उपग्रहों का उपयोग टेलीविजन, रेडियो, internet और सैन्य अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है| 
  • भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (INSAT):-प्रणाली एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़े घरेलु संचार उपग्रह प्रणालीयो में से एक हैजिसके 9 संचार उपग्रह Geo- स्थिर कक्षा में रखे गए है| 
  • हाल ही में छोड़ा गया संचार उपग्रह GSAT-31 जिसे फरवरी 2019 में छोड़ा गया| 
  • Earth Observation satellite:- earth observation satellite एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जो कक्षा में पृथ्वी अवलोकन के लिए उपयोग किया जाता है| ये जासूसी उपग्रह के समान है| लेकिन गैर सैन्य उपयोगो के लिए है जैसे की पर्यवरण निगरानी मौसम विज्ञानं निर्माण आदि| 
  • वर्तमान में 13 परिचालन उपग्रह सूर्य समकालिक कक्षा में और 4 जियोस्टेशनरी orbit में है| 
  • RISAT-2B 22 मई 2019 में छोड़ा गया ये NEW satellite है| 
  • Navigation satellite:- navigation satellite कृत्रिम उपग्रहों की एक प्रणाली को कहते है जो विश्व में सर्वत्र भु-स्थानिक स्थिति Geospatial Positoning प्रदान करने में समर्थ हो| इस प्रणाली से छोटे Electronic Receiver अपनी स्थित की अत्यन्त यथार्थता (Precision) गणना कर लेते है| ये इलेक्ट्रॉनिक रिसीवर वर्तमान स्थानिय समय की गणना भी कर लेते है| 
  • नागरिक अथॉरिटी आवश्कताओ को पूरा करने के लिए ISRO ,GPRS Navigation (gagan)प्रणाली की स्थापना में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया AAI मिलकर काम कर रही हैं|  
  • gagan का मुख्य उद्देश्य नागरिक उड्डयन अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक सटीकता और प्रमाणिकता के साथ सॅटॅलाइट आधारित नेविगेशन सेवाएं प्रदान करना और भारतीय एयरस्पेस बेहतर वायु  यातायात प्रदान करना हैं| 
  • Scientific Spacecraft:-भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम खगोल विज्ञानं खगोल भौतिकी ग्रह पृथ्वी विज्ञानं  ववायुमंडलीय विज्ञानं और सैद्धांतिक जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को शामिल करना है| 
  • Mini satellite:-लधु उपग्रह का द्रव्यमान काफी काम होता है|और आकर भी कम होता है| जो आमतौर पर 500 kg से काम होता है| IMS1,मिनी सॅटॅलाइट है| 28 अप्रैल 2008 में लांच हुई|  Thermosphere, ionosphere परिवर्तनों के बिच सम्बन्धो की जांच करना| 
  • Experimental satellite:-इसरो ने मुख्य रूप से प्रायोगिक के लिए छोटे-छोटे उपग्रह लॉन्च किये है| इस प्रयोग में रिमोट सेंसिंग वायुमंडलीय अध्ययन पेलोड विकाश, कक्षा नियंत्रण पुनःप्राप्ति प्रोधोगिकी आदि शामिल है| 
  • Student satellite:-इसरो ने संचार सुदुर संवेदन और खगोल विज्ञानं के लिए उपग्रह बनाने जैसी गतिविधियों से शिक्षण  संस्थानों को प्रभावित किया है| univerity के reserch के लिए use किया जाता है| ये केवल students के लिए होता है| इस विकल्प के तहत पेलोड (इलेक्ट्रॉनिक संबधित अल्गोरिदम/ प्रोयोग का डिज़ाइन किया जाता है| 
  • इसमें डाटा हैंडिंग और डाटा ट्रांसमिशन इसरो द्वारा किया जाता है| 
  • launch के बाद isro पेलोड डाटा प्राप्त करता है| और इसे university को आगे की प्रक्रिया हुए विश्लेषण के लिए प्रसारित करता है| 
 

satellite ka structure?

satellite-structure
satellite structure 

 

satellite की मुख्य Body में Circuits, Transponders, Transmitter, Receiver लगे हुए होते है| जो signal को भेजने और ग्रहण करने का कार्य करते है| इसके आलावा इसमें कुछ control motor लगे होते हैं जिनकी  मद्दत से satellite को Remotely, Orbit, Angle, Position को आसानी से Control किया जाता है| इसके अलावा satellite किस उद्देश्य के लिए बनाया गया है| जैसे अगर satellite images capture, करने के उद्देश्य से बना है तो इस तरह की satellite में High Quality Camera लगा होता है| अगर वहीं scanning Purpose के लिए  Launch किया गया है तो उसमे Scanning sensor लगे होते हैं| 

Satellite ka kya Use hai(उपग्रह का उपयोग)?

Basically satellite ka Use Communication संचार के लिए किया जाता है| जैसा की आप लोगों को पता होगा पृथ्वी (Earth) के एक Point से दूसरे Point तक communicate करना radio waves से संभव नहीं  हैं| क्योकि waves एक सीधी Straight line में travel करती हैं जिससे पुरी पृथ्वी को cover नहीं किया जा सकता है| अगर ऐसे में Ground waves का use करते है तो ये भी धरती के साथ-साथ Zigzag travel करेगी लेकिन Satellite की तुलना में इसकी strength काफी कम होती है| तो इस condition में satellite का use बहुत ही जरुरी हो जाता है| 
satellite-navigation
navigation 

satellite को धरती से Signal दिया जाता है| उस signal को satellite receive करता है| फिर वापिस उस Signal को धरती के कोने-कोने तक फैला देता है जिससे आपका DTH, Google Map, Satellite Phone work कर पाते हैं|

satellite ka use 
  • Satellite ka  Use Communication me Kiya Jata hai 
  • Satellite ka  Use मौसम का पूर्वानुमान ज्ञात करने में किया जाता है| 
  • Satellite ka  Use Radar में airplane की स्थिति पता लगाने में किया जाता है| 
  • Satellite ka  Use Doordarshan, media channel broadcasting में किया जाता है| 
  • Google map, internet ka use

satellite space me stable (स्थिर) Kaise rahta hai?

satellite हवा में स्थिर कैसे रहती है| john kepler Law के अनुसार अगर किसी Object को Space में रहना है| और  किसी और Object के चक्कर लगाने हैं/ Orbit करना है| तो अगर वो एक Fixed निर्थारित Speed, velocity (वेग) से move करता रहता है/ Fix Path पर Trace करता रहता है| तो वो अपने Orbit  में टीका रहेगा| धरती पर नहीं गिरेगा क्योकि उसकी Speed Gravitational force को  Balanced करती है| 
 
लेकिन ये satellite की उचाई पर निर्भर करता है| जो सॅटॅलाइट धरती से कम उचाई पर होगी तो| उसकी  चक्कर काटने की  गति बहुत तेज होगी| जो सॅटॅलाइट धरती से  काफी दुर होगी| इनका momentum slow होता है| लेकिन सभी का सिद्धांत एक ही है| इसलिए निर्वात में  स्थिर रहती है| 

pahla bhartiya satellite?

pahla bhartiya satellite पहली बार 19 अप्रैल 1975 को लांच किया किया था जिसका नाम आर्यभट्ट रखा गया था| इस उपग्रह को सोवियत संघ रूस एजेंसी Roscosmos की सहायता से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया उस समय हमारे पास कोई technology नहीं थी| जिससे हम अपना satellite launch कर सकते इसलिए हमें रूस की मद्दत लेनी पड़ी थी| पहले satellite का नामकरण इंदिरा गाँधी जी ने प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट जी के नाम पर रखा था| इस उपग्रह का कुल वजन 360 kg था| इस उपग्रह को लांच करने का मुख्य कारण 
 
वैज्ञानिक प्रयोग एवंम शोध करना था| लेकिन तकनीकी खराबी के कारण लांच होने के पाचवे दिन संपर्क टूट गया था| वज्ञानिको का मानना था की उर्जा सञ्चालन में खराबी आ गई थी| ये उपग्रह 17 साल बाद पृथ्वी के वातावरण में Damage Condition में मिला था| इससे भारत को एक बहुत बड़ा झटका लगा लेकिन इस असफलता से भारत के अन्तरिक्ष एजेंसी को एक नई  दिशा मिली थी|  
भारत ने अपना दूसरा उपग्रह 7 जून 1979 में भास्कर-1 को भेजा था इसके बाद भारत ने अपना स्वदेसी उपग्रह रोहिणी प्रक्षेपण यान SLV-3 कक्षा में स्थापित किया गया था| 
 
तो दोस्तों उम्मीद करता हु satellite kya hai, satellite kaise kaam karti hai satellites kitne prakar ka hota hai से आपको कुछ सिखने को मिला होगा| पोस्ट पसंद आये तो शेयर करें| आपका कोई सवाल हो तो हमें comment करें| 
धन्यवाद
 
 
 

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