जानिए कौन हैं गामा पहलवान जिनकी 144वीं जयंती Google Doodle आज मना रहा है?

Google Doodle आज Gama Pehlwan की 144वीं जयंती मना रहा है. गामा पहलवान ने “द ग्रेट गामा” नाम अर्जित किया क्योंकि वह अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपराजित रहे और पूर्ण रूप से सभी समय के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक गिने जाते थे। उसी के बारे में जानकारी देते हुए, Google ने कहा, “गामा पहलवान को व्यापक रूप से सभी समय के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक माना जाता था। गामा अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपराजित रहे और “द ग्रेट गामा” नाम अर्जित किया। अतिथि कलाकार वृंदा ज़वेरी द्वारा बनाया गया आज का डूडल- रिंग में गामा पहलवान की उपलब्धियों का जश्न मनाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में उनके द्वारा लाए गए प्रभाव और प्रतिनिधित्व को भी दर्शाता है।”

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द ग्रेट गामा के रूप में जाने जाने के अलावा, गामा ने अपने करियर के दौरान कई खिताब अर्जित किए, विशेष रूप से विश्व हैवीवेट चैम्पियनशिप (1910) और विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप (1927) के भारतीय संस्करण, जहां उन्हें “टाइगर” की उपाधि से सम्मानित किया गया। टूर्नामेंट। महान पहलवान को सम्मानित करने के लिए भारत यात्रा के दौरान उन्हें प्रिंस ऑफ वेल्स द्वारा एक चांदी की गदा भी भेंट की गई थी। गामा की विरासत आधुनिक समय के सेनानियों को प्रेरित करती रही है। Google द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, यहां तक ​​कि ब्रूस ली भी एक प्रसिद्ध प्रशंसक थे और उन्होंने गामा की कंडीशनिंग के पहलुओं को अपनी प्रशिक्षण दिनचर्या में शामिल किया था!

गामा पहलवान कौन थे?

  1. गामा ने अपना जीवन अपने चाचा के साथ बिताया जो एक पहलवान थे।
  2. गामा पहिलवान को बचपन से ही कुश्ती और व्यायाम में रुचि थी।
  3. गामा पहलवान दिन में 10 घंटे से अधिक अभ्यास करते थे और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक दिन में 40 पहलवानों के साथ अखाड़े में कुश्ती करते थे।
  4. जब गामा पहलवान 10 साल के थे तो गामा ने एक प्रतियोगिता में भाग लिया और 400 लोगों के बीच अपनी पहचान बनाते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
  5. गामा पहलवान ट्रेनिंग के दौरान रोजाना 5000 स्क्वाट और 3000 पुशअप्स किया करते थे।
  6. 1890 से 1910 तक गामा पहलवान ने भारत के महानतम पहलवानों से मुकाबला जारी रखा और सभी मैच जीते।
  7. गामा पहलवान ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहलवानों को हराकर भारत का सम्मान बढ़ाया।
  8. कई दशकों तक मैच खेलने और अपने करियर में पांच हजार मैच खेलने के बाद भी गामा अपराजित रहे।
  9. गामा पहलवान रोज 6 देसी चिकन, 10 लीटर दूध, आधा लीटर घी, डेढ़ लीटर मक्खन, बादाम का शरबत और 100 रोटियां खाते थे।
  10. विभाजन के समय गामा पहलवान पाकिस्तान में ही रहे। लेकिन फिर उन्होंने हिंसा में कई हिंदू परिवारों की जान बचाई। पाकिस्तान की सरकार ने उसकी सुध नहीं ली और अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह पैसों की तंगी से जूझता रहे। 1960 में 82 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। लेकिन आज भी उनका नाम भारत और पाकिस्तान में गूंजता है।

गूगल डूडल में गामा पहलवान को क्यों दिख रहा है?

गूगल डूडल में उन्हें गामा पहलवान का 144वां जन्मदिन मनाने के लिए मजबूती से खड़ा देखा जा सकता है। उनके दाहिने हाथ में चांदी की गदा है। यह गदा उन्हें प्रिंस ऑफ वेल्स ने दी थी।

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